कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

आधार पर सुप्रीम कोर्ट- प्राइवेट कंपनियां किसी से भी आधार की नहीं कर सकती मांग

कोर्ट ने कहा कि सरकार जितनी जल्दी संभव हो आंकड़ों की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र बनाए।

सुप्रीम कोर्ट ने आधार की वैधानिकता पर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने आधार विधेयक के धारा 57 को हटा दिया है। मतलब अब प्राइवेट कंपनियां किसी भी व्यक्ति से आधार नहीं मांग सकती हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने आधार विधेयक के अनुच्छेद 47 को भी समाप्त कर दिया जिसमें लिखा गया है कि ‘किसी भी काम के लिए.’ आधार अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा यह कोई कानून नहीं है।

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद अब आधार से जुड़ी कई चीजें स्पष्ट हो गई हैं। फैसले में कहा गया है की बैंक खातों को आधार से जोड़ना जरूरी नहीं होगा। इसके साथ ही बच्चों के दाखिले के लिए भी आधार अनिवार्य नहीं रहा। सीबीएसई और नीट और की परीक्षाओं में आधार की अनिवार्यता भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद खत्म हो गई है। इसके अलावा मोबाईल नंबर को भी आधार से जोड़ना अब ज़रूरी नहीं होगा।

वहीं आधार को पैन कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए भी आधार को अनिवार्य माना गया है। सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ लेने के लिए भी आधार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनिवार्य माना गया है।

इसके साथ कोर्ट ने कहा कि सरकार जितनी जल्दी संभव हो आंकड़ों की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र बनाए।अगर किसी व्यक्ति का डेटा किसी को दें तो उसे बताए। आधार प्राइवेसी में दखल तो है पर ज़रूरी है।

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