कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पहले भी हुए हैं सर्जिकल स्ट्राइक, अब ढिंडोरे पीटे जाते हैं पर परिणाम नहीं दिखता: कारगिल जंग के हीरो ब्रिगेडियर बाजवा

पूर्व ब्रिगेडियर ने लिखा कि, “सर्जिकल स्ट्राइक पर कई विवादास्पद बयान दिए गए. यह दुखद है कि इस पर राजनीतिकरण किया गया है. सेक्टर स्तर पर भी इस तरह के हमले पहले किए गये थे.”

कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल पर कब्जा करने वाले रिटायर्ड ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा ने सोमवार को कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक पहले भी हुआ है और उसपर वर्तमान में राजनीतिकरण किया जा रहा है.

ट्वीट कर उन्होंने लिखा है कि, “सर्जिकल स्ट्राइक पर कई विवादास्पद बयान दिए गये. यह दुखद है कि इस पर राजनीतिकरण किया गया है. सेक्टर स्तर पर भी इस तरह के हमले पहले किए गये थे.”

उन्होंने कहा कि, “सिर्फ अंतर इतना है कि अब यह ‘राष्ट्रीय स्तर’ पर किया जाता है, प्रचार-प्रसार और धूमधाम के साथ, लेकिन कोई स्पष्ट परिणाम नहीं दिखता.”

कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल पर कब्जा करने वाले ब्रिगेड की कमान ब्रिगेडियर बाजवा ने संभाली थी. इस जीत के लिए ब्रिगेडियर को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. साथ ही वह 1971 के भारत-पाक युद्ध का अनुभव भी उन्हें है.

2016 में पाक पर किए गये सर्जिकल स्ट्राइक को केंद्र की मोदी सरकार की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रचार-प्रसार कर इसे लोकप्रिय बनाया गया. साथ पार्टी के नेताओं ने अपनी भाषण में इसका ज़िक्र किया.

इस हफ्ते की शुरूआत मे जब कांग्रेस पार्टी ने यूपीए सरकार में किए गये 6 सर्जिकल स्ट्राइक की सूची जारी की थी. इस सूची को प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वीडियो गेम का संचालन’ बताकर इसका मज़ाक उड़ाया था.

मोदी सरकार की इस टिप्पणी की सेना में शामिल कई लोगों ने कड़ी निंदा की. ये वो दिग्गज थे जो पहले किए गये हमले का हिस्सा थे. इसमें पूर्व लेफ़्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा भी शामिल थे जिनकी निगरानी में 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था.

डीएस हुड्डा ने 4 मई को एएनआई से कहा था कि, “सर्जिकल स्ट्राइक कोई नयी बात नहीं है.”

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