कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पहले सोचती थी पढ़-लिखकर सुषमा स्वराज बनूंगी, पर अब नहीं बनना, लोग मज़ाक उड़ाते हैं; आख़िर बच्ची ने ऐसा क्यों कहा. पढ़ें-

सुषमा स्वराज के द्वारा गोद लिए गांव 'अजनास' की हालत है ख़स्ता. अस्पताल और सड़क के लिए अब भी तरसते हैं लोग.

”पहले तो मैं, सोचती थी कि पढ़-लिखकर सुषमा स्वराज बनना है, लेकिन अब नहीं बनना. लोग इतना मज़ाक उड़ाते हैं और गालियां भी देते हैं.” ये शब्द 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली दिव्या के हैं, जो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के गोद लिए गांव अजनास में रहती है. और गांव के ही स्कूल में पढ़ती है.

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने आदर्श ग्राम योजना के तहत गांवों को मॉडल बनाने के लिए गोद लेकर विकसित करने का सुनहरा वादा किया था. इस योजना के तहत विदेश मंत्री स्वराज ने मध्य प्रदेश के विदिशा के असनास गांव को गोद लिया था. लेकिन, इस गांव के हालात साढ़े चार सालों में भी नहीं सुधरे. स्कूल हो या शौचालय या गांव की सड़के और अस्पताल. गांव के लोगों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है. गांव के लोगों का विदेश मंत्री से यही सवाल है कि आख़िर उन्होंने गांव को गोद ही क्यों लिया था.

बीबीसी हिन्दी की एक रिपोर्ट के अनुसार असनास गांव में लगभग 6 हज़ार की आबादी है. इतनी बड़ी आबादी वाले गांव में मात्र एक स्कूल है. जिसमें क़रीब 800 बच्चे पढ़ते हैं. 800 छात्रों के इस स्कूल में केवल 2 शौचालय हैं, लेकिन उनसे भी गंदी बदबू आती है. स्कूल के प्रधानाचार्य का कमरा भी टूटा-फूटा है. स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक बोलते हैं कि “शौचालय की गंदी बदबू पूरे स्कूल में फैली रहती है. यहां के छात्र और शिक्षक आदर्श ग्राम की महक से अभ्यस्त हो गए हैं. हमारे पास अपना पेट पालने और यहां पढ़ने वाले बच्चों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है.” स्कूल की कक्षाओं के हालात कुछ इस क़दर ख़राब हैं कि कक्षा का फर्श किसी धूलभरी सड़क के समान प्रतीत होता है.

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