कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मोदी सरकार की शिक्षा नीतियों के ख़िलाफ़ सड़क पर हजारों शिक्षक, मांग- हरेक को शिक्षा और रोज़गार

उन्होंने कहा कि सरकार नए विभागवार रोस्टर के जरिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को खत्म करने की योजना बना रही है.

देश की राजधानी दिल्ली में हज़ारों शिक्षकों ने मोदी सरकार की शिक्षा नीतियों के ख़िलाफ़ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया. शिक्षकों की मांग है कि देश के सभी नागरिक को मुफ्त या सस्ती शिक्षा के साथ रोज़गार के अवसर प्राप्त हों.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार दिल्ली विश्वविद्याल की प्रोफेसर नजमा रहमानी ने कहा कि सरकार धीरे-धीरे सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को नष्ट कर रही है और निजी शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यों के सरकारी स्कूलों को केंद्र से पैसा और सहायता नहीं मिल रहा है. वर्तमान सरकार भारत के संघीय ढांचे को नष्ट कर रही है.

विरोध प्रदर्शन कर रही प्रोफेसर का कहना है कि स्कूल के पाठ्यक्रम को धर्मनिरपेक्षता को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. सरकार स्कूली किताबों और प्रार्थनाओं में हिंदू विचारधार को प्राथमिकता दे रही है. जो भारत के विचार को नुकसान पहुंचा रहा है.

प्रोफेसर नजमा रहमानी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में खाली पदों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार नए विभागवार रोस्टर के जरिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को खत्म करने की योजना बना रही है.

उन्होंने बताया कि आरक्षित श्रेणी के लगभग 55 प्रतिशत शिक्षक पद अलग-अलग विश्वविद्यालयों में खाली पड़े हैं. जो लंबे समय से संस्थानों द्वारा नहीं भरे गए हैं. हालांकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कई बार कॉलेजों में रिक्त पदों को भरने को कहा लेकिन यह अब तक नहीं किया गया है.

रहमानी ने आगे बताया कि अल्पसंख्यक विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर जैसे पदों के लिए 5606 पद खाली हैं. अनुसूचित जाति के लिए 873, अनुसूचित जनजाति के लिए 493, ओबीसी के लिए 786 और पीडब्ल्यूडी के 264 पद खाली हैं. जिनमें स्वीकृत पदों की कुल संख्या 17,092 है.

उत्तर प्रदेश के चार केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों, सहायक प्रोफेसरों  तथा सभी श्रेणियों के प्रोफेसरों के लिए 1246 खाली पद है. प्रोफेसर रहमानी ने मौजूदा समय में दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों को स्वायत्तता देने पर सरकार के रुख की आलोचना की.

जॉइंट फोरम फॉर मूवमेंट ऑन एजुकेशन (JFME) द्वारा विरोध मार्च का आयोजन इतिहासकार रोमिला थापर, प्रख्यात लेखक गीता हरिहरन और कर्नाटक संगीत गायक टी एम कृष्णा सहित प्रख्यात हस्तियों द्वारा किया गया था.

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