कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मरीज़ों को नहीं मिल रहा ‘आयुष्मान भारत’ का लाभ, अस्पताल हो रहे हैं मालामाल

आयुष्मान योजना के तहत दी जाने वाली राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा अस्पताल अपने सर्विस शुल्क के नाम पर वसूल रहे हैं.

आयुष्मान भारत योजना को मोदी सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में से एक ज़रूर बताती हो लेकिन धरातल पर इसकी सच्चाई कुछ और ही है. योजना का लाभ मरीज़ों से ज़्यादा अस्पताल को मिलता दिख रहा है. दरअसल, अब आयुष्मान योजना के तहत दी जाने वाली राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा अस्पताल अपने सर्विस शुल्क के नाम पर वसूल रहे हैं.

बता दें कि इस योजना के तहत मरीज़ों को 5 लाख तक मुफ़्त इलाज़ कराने की छूट है. लेकिन, अस्पतालों के इस रवैए से अब हज़ार रुपए की जांच भी मुफ़्त में नहीं पा रही है.

राज एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार इंदौर मे स्थित महाराजा यशवंतराव सरकारी अस्पताल (एमवायएच) में मरीज़ को यदि एमआईआर, सीटी स्कैन कराना है तो वह पूरी तरह से मुफ़्त में नहीं हो रही है. इसके लिए जो छूट के लिए जो निर्धारित राशि तय की गई है वह राशि डायग्नोस्टिक केंद्र द्वारा तय की गई राशि से बहुत कम है. ऐसे में मरीज़ को बाकी राशि देनी पड़ती है.

ख़बर के अनुसार योजना के तहत मिलने वाली राशि का 40 प्रतिशत हिस्सा शासन काट लेता है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी बीमारी का पैकेज 1 लाख है तो इसमें 40 प्रतिशत राशि शासन द्वारा शुरुआत में ही काट ली जाती है. 40 प्रतिशत राशि उस एजेंसी (विडाल) को मिलता है जो इसका संचालन करती है. बची हुई 60 प्रतिशत राशि में से 30 प्रतिशत राशि डॉक्टर्स, पैरामेडिकल और अन्य स्टाफ आदि को दी जाती है. इसके बाद बची हुई 30 प्रतिशत राशि मरीजों पर खर्च की जा रही है.

यानी आयुष्मान योजना के तहत दी जाने वाली राशि का 70 प्रतिशत तक अस्पताल अपने सर्विस शुल्क के नाम पर वसूल रहा है. मरीज़ के इलाज के नाम पर नाममात्र ही राशि खर्च हो रही है.

यदि आयुष्मान योजना के तहत जनरल वार्ड में भरती मरीज़ को प्रतिदिन 1800 और आईसीयू के लिए 3600 रुपये दिए जा रहे हैं. यानी जनरल वार्ड में भर्ती मरीज़ की जांच, दवा के नाम पर सिर्फ 30 प्रतिशत यानी 540 रुपये मिल रहा है.

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