कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नरेन्द्र मोदी लोकतंत्र के लिए ख़तरा, प्रधानमंत्री के लिए राहुल गांधी बेहतर विकल्प: द इकोनॉमिस्ट

इस पत्रिका ने नोटबंदी को एक फ़ेल योजना बताया है और कहा कि इससे किसानों और छोटे व्यापारियों को बहुत नुक़सान हुआ.

लोकप्रिय विदेशी पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने नरेन्द्र मोदी की सरकार दोबारा चुने जाने के ख़तरे को बताया है. इसके साथ ही पत्रिका ने कहा है कि भारत के लोगों के लिए अच्छा होगा अगर वे नरेन्द्र मोदी की जगह किसी दूसरे नेता को प्रधानमंत्री बनाते हैं.

पत्रिका के हालिया संपादकीय में नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की स्पष्ट आलोचना की गई है. मोदी सरकार के कार्यकाल में घरेलू और विदेशी समस्याओं में हुई बढ़ोतरी और बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है.

विदेश और आर्थिक नीति

पाकिस्तान की सीमा में भारत द्वारा फाइटर प्लेन भेजे जाने को द इकोनॉमिस्ट  ने एक दुस्साहस बताया है, जिसका परिणाम त्रासदी से भरा हुआ हो सकता था. पत्रिका ने जम्मू कश्मीर के मुश्किल हालातों के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. कहा गया है कि नरेन्द्र मोदी के कारण कश्मीर में अलगाववाद की समस्या बढ़ी है और प्रदर्शन करने वाले कश्मीरियों पर बर्बरता से कार्रवाई की जा रही है.

इस पत्रिका ने नोटबंदी को एक फ़ेल योजना बताया है और कहा है कि इससे किसानों और छोटे व्यापारियों को बहुत नुक़सान हुआ.

भारतीय मीडिया को दबाने के लिए भी द इकोनॉमिस्ट ने मोदी सरकार की आलोचना की है. इसके साथ ही अपने समर्थक मीडिया चैनलों पर कृपा बरसाने के लिए भी मोदी सरकार की आलोचना की गई है.

द इकोनॉमिस्ट  ने अपने लेख में मोदी के कार्यकाल में भारतीय रिज़र्व बैंक, आयकर विभाग, शिक्षण संस्थान और देश के अन्य संस्थानों की गिरती साख के मुद्दे पर भी मोदी सरकार को घेरा है.

नफ़रत, डर और सांप्रदायिकता

हिन्दू-मुसलमान के बीच बढ़ते तनाव को मोदी सरकार की सबसे बड़ी ग़लती के रूप में बताया गया है. इसके साथ ही द इकोनॉमिस्ट ने गुजरात दंगे में 1000 लोगों की जान जाने के बावजूद मोदी की चुप्पी और माफ़ी ना मांगने के लिए उनकी आलोचना की है.

द इकोनॉमिस्ट  ने गौरक्षा के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और राष्ट्रवाद के नाम पर उपजी भीड़ के लिए भी मोदी सरकार की आलोचना की है. इसके साथ ही कहा गया है कि भारत के साढ़े 17 करोड़ लोग दूसरे दर्जे के नागरिक की तरह महसूस कर रहे हैं.

संपादकीय लेख के अंत में द इकोनॉमिस्ट  ने कांग्रेस पार्टी के चुनावी मेनिफ़ेस्टो को प्रभावशाली बताया है. पत्रिका ने कहा है कि इससे देश के ग़रीबों को फ़ायदा होगा. इसके साथ ही द इकोनॉमिस्ट  ने राहुल गांधी की तारीफ भी की है.

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