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राफ़ेल खरीद प्रक्रिया से बैंक गारंटी के प्रावधान को प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल पर ही हटाया गया है- माकपा

माकपा ने पूरे ख़रीद प्रक्रिया के लिए उच्च स्तरीय जांच की मांग की.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने लड़ाकू विमान राफेल की खरीद में कथित गड़बड़ी के लगातार हो रहे नये ‘‘खुलासों’’ का हवाला देते हुए, समूची खरीद प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है.
माकपा पोलित ब्यूरो ने सोमवार को कहा कि राफेल मामले में मीडिया रिपोर्टों (अंग्रेजी अख़बार ‘द हिन्दू’) के माध्यम से लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं. इनमें ताजा मामला राफेल की खरीद प्रक्रिया के प्रावधानों से भ्रष्टाचार रोधी प्रावधान हटाने और सौदे से जुड़ी बातचीत में समानांतर रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय के शामिल होने का खुलासा होने से जुड़ा है.

पोलित ब्यूरो द्वारा जारी बयान के अनुसार पार्टी ने कहा कि इन खुलासों के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि खरीद प्रक्रिया से बैंक गारंटी के प्रावधान को, प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल पर ही हटाया गया है.
माकपा ने मोदी सरकार पर उच्चतम न्यायालय के सामने भी इस मामले के पूरे तथ्य पेश नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शीर्ष अदालत को इस मामले में दिये गए अपने पूर्व आदेश के संदर्भ में इस बात पर स्वत: संज्ञान लेना चाहिये.
पार्टी ने कहा कि इस सौदे पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), की रिपोर्ट प्रतीक्षारत है लेकिन राफेल करार के समय तत्कालीन वित्त सचिव के मौजूदा सीएजी प्रमुख होने के कारण हितों का टकराव भी स्पष्ट दिख रहा है.
ऐसे में सीएजी रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं. माकपा ने इन दलीलों के साथ राफेल खरीद मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की.

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