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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को ही नहीं मालूम थी सवर्ण आरक्षण की बात, CPI (M) ने उठाए सवाल

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने का ऐलान किया था.

मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़ी सभी सवर्ण जातियों को आरक्षण देने का फ़ैसला किया है. लेकिन, कहा जा रहा है कि नोटबंदी की तरह सरकार ने इस फ़ैसले की जानकारी भी संबंधित मंत्रालय को नहीं दी थी. लोकसभा में इस विधेयक को पेश करने के कुछ समय पहले ही सरकार ने कथित रूप से एक सांसद को कहा था कि इस तरह के कोटा के लिए प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी ने इस पर सवाल उठाए हैं.

सीताराम येचुरी ने ट्विटर कर लिखा कि मोदी सरकार देश को गुमराह कर रही है. जल्दबाज़ी में विधेयक लेकर आई और हमें बोल दिया कि इसमें संशोधन नहीं हो सकता क्योंकि काफ़ी देर हो चुका है. येचुरी ने एक आवेदन पर सामाजिक कल्याण मंत्रालय से इस संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब को रीट्वीट किया है.

पत्र में सवाल किया गया था कि क्या सामाजिक न्याय मंत्रालय अगड़ी जातियों के गरीब छात्रों की शिक्षा और रोज़गार हेतु आरक्षण प्रदान करने की संभावनाओं की तलाश कर रही है या फिर क्या सरकार के पास आर्थिक रूप से पिछड़ी सवर्ण जातियों को आरक्षण देने संबंधी मांगें मिली हैं.

इन प्रश्नों के जवाब में सरकार ने जवाब दिया था कि वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव उसके विचाराधीन नहीं है.

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