कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

EXCLUSIVE: उसके पैर के नाखूनों, जांघों में कील ठोंकी गई: बिहार में पुलिस ने की मुस्लिम युवकों की बर्बर दशा

"तड़पा तड़पा कर मारने से अच्छा होता कि पुलिस उसे तलवार से काट देती".. मारे गए गुफ़रान के चचेरे भाई ने बयां किया दर्द

तारीख़ 8 मार्च. शुक्रवार की शाम. पूर्वी चंपारण का रमडीहा गांव. गुफ़रान की मौत के 48 घंटे से ज़्यादा हो गए हैं. घर के ठीक सामने बीस से पच्चीस लोग आपस में बात कर रहे हैं. पास जाने पर मालूम चलता है कि कल सीतामढ़ी जाने की प्लानिंग बन रही है. गांव के लोग प्रशासन के ढुलमुल रवैए से नाखुश हैं, और वे एक बार फिर सीतामढ़ी पहुंचकर प्रशासन को झकझोरना चाहते हैं.

इसी भीड़ में गुफ़रान के चचेरे भाई तनवीर हैदर भी बैठे हैं. तनवीर कहते हैं, “इसमें बताने वाली बात नहीं कि हम बहुत दुखी हैं. गुफ़रान के ग़ुस्ल(मरने के बाद कराया जाने वाला स्नान) में हमने देखा है कि उसके पैर के दोनों नाखूनों में लोहे की कील ठोंकी गई थी. उसके जांघ में भी कील ठोंकी गई है. पुलिस यहां से उसे मारने के लिए ही ले गई थी. उसे तड़पा तड़पा कर मारा गया है. मैं तो कहता हूं कि उससे अच्छा होता कि पुलिस उसे गोली मार देती…उसको तलवार से काट देती तो उतना दुख नहीं होता. उसे तड़पाकर एक-एक पल मारा गया है.”

तनवीर आगे कहते हैं, “यह सभी को मालूम है कि गुफ़रान पर कोई केस नहीं है. यह बात हाई लेवल के अफ़सरान भी जान रहे हैं. अब ये नहीं है कि क्या ले गए क्या नहीं ले गए…अब इसमें पुलिस डिपार्टमेंट की लीपा पोती महत्वपूर्ण बात है. डिपार्टमेंट तो हमेशा अपना ही पक्ष लेगी. बताया जा रहा है कि तीन डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम की है. वीडियोग्राफ़ी भी किया गया है. यह सब कहा जा रहा है पब्लिक को दिखाने के लिए. लेकिन हक़ीक़त यह है कि पोस्टमार्टम करने से पहले परिवार वालों से पूछा भी नहीं गया. हमलोग को तो गुफ़रान को अस्पताल में खोजने में ही दो घंटे लग गए.”

गुफ़रान का चचेरा भाई तनवीर हैदर (चित्र साभार- न्यूज़सेंट्रल24X7)

 

पुलिस प्रशासन के ख़िलाफ़ इस प्रकार की नाराज़गी रमडीहा के हर बूढ़े-जवान के मुंह से सुनने को मिलती है. बात बस एक ही है- गुफ़रान और तस्लीम की मौत का इंसाफ़.

बता दें कि बीते 5 मार्च(मंगलवार) की रात को सीतामढ़ी पुलिस हत्या और लूट के मामले में चकिया थाना के अंतर्गत आने वाला गांव रमडीहा(ज़िला-पूर्वी चंपारण) में छापा मारती है. छापेमारी में रमडीहा गांव के ही निवासी गुफ़रान आलम(30) और मो. तस्लीम(35) को पूछताछ के लिए हिरासत में लेती है. उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दोनों आरोपियों की सीतामढ़ी ज़िला के डुमरा थाना के हाजत(हवालात) में मौत हो जाती है. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने गुफ़रान और तस्लीम की बेरहमी से पिटाई की जिसके कारण उनकी मौत हो गई.

इस मामले को लेकर डुमरा थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. इसी बाबत सीतामढ़ी एसपी अमरकेश डी का भी तबादल कर दिया गया है. मामले की जांच जोनल डीआईजी ख़ुद सम्भाल रहे हैं. हालांकि परिजनों की मांग है कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए.

पैर ठीक रहता तो अपने बच्चे को बचा लेता

मोलाजिम अंसारी, जो तस्लीम के पिता हैं. पिछले काफ़ी महीनों से बिस्तर पर ही पड़े हैं. जांघ की हड्डी टूटी हुई है. पास बैठने पर पैजामा ऊपर कर हड्डी दिखाने लगते हैं. कहते हैं, “पैर ठीक रहता तो अपने बच्चा को बचा लेता. लेकिन कहीं जाने के काबिल नहीं हूं.”

मंगलवार की रात की घटना के बारे में पूछने पर बताते हैं कि “मंगलवार की रात डेढ़ बजे(यानी बुधवार की सुबह) लगभग बीस पुलिस आती है. सात-आठ लोग दरवाज़े का कब्जा तोड़कर अंदर घुस जाते हैं. बाकी लोग बाहर से घर को घेर लेते हैं. घर के हर कमरे में सामान को तितर-बितर कर देते हैं. चावल-दाल सब उलट देते हैं. उस समय तस्लीम बगल के मदरसा में सो रहा था.”

सात-आठ लोग दरवाज़े का कब्जा तोड़कर अंदर घुस जाते हैं.(चित्र साभार- न्यूज़सेंट्रल24X7)

 

मोलाजिम अंसारी से हो रही बातचीत के बीच में ही उनकी पत्नी भी भोजपुरी में बात दोहरा रही हैं. कहती हैं,”नेवता कहीं रहे नू त देले रहे बउवा के दावत, त खा के अइलन रात में त हमनी के नींद पड़ गइल रहे…फिर दरवाजा न खुलल त मदरसे में जाके लइकन सभे लेट गइलन (गांव में किसी के यहां से दावत के लिए आमंत्रण मिला था तो वह वहां से देर रात खाकर आया. उस वक्त दरवाजा बंद था. सभी सो गए तो वो मदरसा में जाकर सो गया.)

अंसारी आगे बताते हैं कि किसी ने पुलिस को ख़बर दे दी थी कि तस्लीम मदरसा में सोया हुआ है. पुलिस उसे वहां से उठा लेती है.

वह आगे कहते हैं, “तस्लीम कई बार पूछा कि आप कहां से आए हैं और मुझे किस केस में ले जा रहे हैं. पुलिस कुछ जवाब नहीं दी. बच्चे को जैकेट भी नहीं पहनने दी. ऐसा बेदर्दी से मारा है कि जब मरा नहीं तो करंट दे दिया सब”

तस्लीम की मां बीच-बीच में रोने लगती हैं,कहती हैं,”लइका के पैर में कांटी ठोंक देले रहसन”

तस्लीम के माता-पिता (चित्र साभार- न्यूज़सेंट्रल24X7)

 

अभी बात हो ही रही थी कि तस्लीम का दोस्त कुणाल सिंह पहुंचते हैं. कुणाल बताते हैं,”तस्लीम मदरसा का ही देखरेख का काम करता था. बाकी घर का खेती बाड़ी का काम करता था. जिस मामले को लेकर पुलिस पूछताछ के लिए गिरफ़्तार की थी उस रात मैं भी तस्लीम के साथ था. 20 फ़रवरी तस्लीम मेरे साथ शादी अडेंट करने मेजरगंज गया था. मेरे मामा घर शादी थी. हमदोनों बोलेरो चार चक्का से गए….अब आप ही बताए कि चार चक्का से कोई मोटरसाइकल लूटने जाएगा?”

तस्लीम का दोस्त कुणाल सिंह (चित्र साभार- न्यूज़सेंट्रल24X7)

 

कुणाल आगे कहते हैं कि “सबसे पहले थाने को जांच कर लेना चाहिए था. अगले दिन सुबह मुझे थानाध्यक्ष फ़ोन पर कहते हैं देखो तुम्हारे दोस्त को पिटवा रहा हूं. मैं तो उस वक्त भी बोला कि सर आप पहले जांच कर लें.”

एक ज़िन्दगी नहीं एक साथ कई ज़िन्दगियां बर्बाद हो गई

गुफ़रान की पत्नी का रोकर बुरा हाल है. बोलने की स्थिति में नहीं है. जितना बोलती है उससे ज़्यादा रोती हैं. रोना और बोलना एक लय में आ गया है. कहती हैं,”बेकसूर आदमी को डाकू उठाकर ले गए हैं. दोनों बच्चे अनाथ हो गए. मैं हूं और पूरा घर है. जान के बदले कौन जान देगा. मन कर रहा कि सभी का जान ले लूं.”

गुफ़रान की पत्नी

गुफ़रान के पिता मनव्वर अली बताते हैं कि “मेरा बेटा चार महीने पहले ही सऊदी से यहां आया था. सऊदी में ही इलक्ट्रीशीयन का काम करता था. दो साल बाद वहां से आया था. उस रात पुलिस बिना कुछ बताए उठाकर लेकर चली जाती है.”

आगे कहते हैं,”आज तक उस पर कोई केस ही नहीं है. पुलिस से मेरा बेटा पूछा कि क्यों ले जा रहे हो मुझे- पर पुलिस कुछ नहीं बोली.”

बेटे से अंतिम बार बात को लेकर मनव्वर अली बताते हैं कि “बुधवार की सुबह तकरीबन दस बजे मेरे भाई सनउर अली से उसकी बात हुई थी. थाने से न जाने कौन फ़ोन कर बात करा दिया था. मैं तो बस रिकॉर्डिंग ही सुन पाया- बोल रहा था कि पुलिस वाले मुझसे पूछताछ कर रहे हैं. मुझे बहुत मार भी रहे हैं.”

गुफ़रान के पिता मनव्वर अली (चित्र साभार- न्यूज़सेंट्रल24X7)

 

सनउर अली बताते हैं, “हमलोग तो जान रहे थे कि चकिया थाना ले गया होगा. लेकिन उसे चकिया थाना से सीतामढ़ी के डुमरा थाना भेज दिया गया था. पुलिस हमें कुछ नहीं बता रही थी. किसी प्रकार हमें सुबह 11 बजे यह पता चला कि वो डुमरा थाना के हाजत में है. जब हम वहां पहुंच तो वहां दो-तीन महिला पुलिस थीं. उन्होंने कहा कि यहां चकिया थाना से कोई मामला आया ही नहीं है. हमने रिक्वेस्ट भी किया कि प्लीज़ आप रजिस्टर चेक कर लें.”

सनउर अली आगे बताते हैं कि “एक घंटे बाद किसी पत्रकार या अपने व्यक्ति के थ्रू ही पता चलता है कि वो दोनों सदर अस्पताल में भर्ती हैं और काफ़ी सिरियस हैं. वहां भी पुलिस कुछ नहीं बताई. हमें अंदर जाने से मना कर दे रही थी. बाद में किसी पत्रकार से पता चला कि गुफ़रान और तस्लीम की तो मौत हो गई.”

क्या है परिजनों की मांग

तस्लीम के पिता मोलाजिम अंसारी बताते हैं कि घटना के बाद से कई नेता आए और पूछे कि क्या किया जाए आगे. मैं तो बस यही कहा कि “मुझे मेरा बेटा ज़िंदा चाहिए. मुर्दा नहीं चाहिए. हम तो ज़िंदा दिए मुर्दा काहे लेंगे. पुलिस को काहे माफ़ करेंगे.”

गुफ़रान के चचेरे भाई तनवीर हैदर कहते हैं, “यदि पुलिस को सज़ा मिल भी जाती है तो उसे उसकी करनी की सज़ा मिलेगी. लेकिन गुफ़रान के बिना उसकी पत्नी और उनके अनाथ बच्चे जो सज़ा भुगत रहे हैं, उसकी भारपाई आख़िर कौन करेगा. मौत की कोई क़ीमत तो नहीं होती पर बिहार सरकार से गुजारिश है कि वह इसके लिए सोचे.”

जुटे लोगों में कई लोगों का कहना था कि पुलिस को सज़ा देने के साथ-साथ घर में किसी को नौकरी भी दी जाए. उचित मुआवज़ा मिले.

गुफ़रान के घर पर लोगों का जमावड़ा (चित्र साभार- न्यूज़सेंट्रल24X7)

 

पुलिस की अब तक की कार्रवाई

परिवार वालों का आरोप है कि जब उन्होंने पुलिस के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करवाई तो उसका कागज भी नहीं दिया गया. यहां तक की प्रशासन के तरफ़ से अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कागज भी नहीं मिली है.

गुफ़रान के घर पर जुटे लोगों में मोल्लाना अजमेर आलम भी बैठे हैं, कहते हैं, “बिना किसी सूचना के देर रात दरवाज़ा खोलकर पुलिस का घर में घुस जाना और किसी को सीधे उठा लेना. यह कहीं से नहीं लगता कि बिहार में क़ानून का राज है. अभी किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है. कभी बताया जाता है कि कोई पकड़ाया..फिर कोई थाना से ही भाग जाता है. यह सब पुलिस की नौटंकी है.”

गुफ़रान के परिजन द्वारा डुमरा थानाध्यक्ष तथा अन्य पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करने के बाबत लिखा गया एप्लीकेशन (चित्र साभार- न्यूज़सेंट्रल24X7)

हालांकि पुलिस प्रशासन ने हत्या के आरोपी डुमरा थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. फरार थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मियों को लेकर तलाश अभियान जारी है.

शनिवार को डीआईजी ने पूरे मामले की जांच रिपोर्ट आईजी को सौंपी है. अभी तक जांच में क्या बात निकलकर सामने आई है, इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है.

डीआईजी मुज़फ़्फ़रपुर अनिल सिंह नें न्यूज़सेंट्रल24×7 को फ़ोन पर बताया कि “भागे हुए पुलिसकर्मियों की तलाश जारी है. आगे उनके ख़िलाफ़ कुर्की की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.” जोनल आईजी को सौंपे गए रिपोर्ट के संबंध में कुछ भी जानकारी पूछने पर उन्होंने इस बार में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया.

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