कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सबरीमला मंदिर में प्रवेश से दो महिलाओं को रोका, प्रदर्शनकारियों ने बीच रास्ते से ही वापस लौटाया

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद भी सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश मुश्किल नज़र आ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सबरीमला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश मुश्किल हो रहा है। आज प्रदर्शनकारियों ने सबरीमला के दर्शन के लिए जा रही दो महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोक दिया। मंदिर से 500 मीटर की दूरी से ही इन महिलाओं को वापस लौटना पड़ा।

सत्याग्रह की रिपोर्ट के अनुसार दरअसल हैदराबाद की मोजो टीवी महिला पत्रकार कविता जक्कल और सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा सुबह सुरक्षा के बीच मंदिर पहुंचे थे। लेकिन उन्हें बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा क्योंकि उनके मंदिर में प्रवेश को लेकर विरोध किया जा रहा था। इससे पहले गुरुवार को भी एक महिला पत्रकार को विरोध की वजह से  वापस लौटना पड़ा था।

ज्ञात हो कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सबरीमला मंदिर के कपाट हर उम्र की महिला के लिए खोल दिए गए थे। लेकिन कोर्ट के इस फ़ैसले का व्यापक स्तर पर विरोध हो रहा है। विरोध करने वालों का कहना है कि भगवान अय्यपा ब्रहम्चारी थे और 10-50 वर्ष की आयु वाली अशुद्ध महिलाओं का मंदिर में प्रवेश करना परम्परा के ख़िलाफ़ है। इसलिए प्रदर्शनकारी महिलाओं को आधे रास्ते से ही वापस जाने को कह रहे हैं और महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं।

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