कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

उदय योजना की हालत ख़स्ता, डिस्कॉम के घाटे और राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ में बढ़ोतरी

उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2015 में लांच किया गया था.

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी उदय योजना फ़ेल हो चुकी है. तीन सालों में उदय के पोर्टल में उपलब्ध डाटा विश्लेषण डिस्कॉम में नुक़सान में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाती है.

2015 में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) ‘इस क्षेत्र में भविष्य के सभी संभावित मसलों एवं पिछले सभी समस्याओं का स्थायी समाधान है’.

गौरतलब है कि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक फाइनेंस एंड प्लानिंग द्वारा प्रकाशित एक लेख में यह इंगित किया गया है कि किस तरह यह योजना अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पा रही है.

वित्तीय वर्ष 2018-19 के टारगेट नंबरों के मुताबिक़, उदय योजना के तहत तकनीकी एवं व्यवसयिक (एटी&सी) घाटों में उन सभी राज्यों में 15 प्रतिशत कि कमी आ जानी चाहिए तो जो इस योजना से जुड़े हुए हैं.

लेकिन इन राज्यों में तकनीकी एवं व्यवसयिक घाटे अभी भी 25.41% पर हैं.

इस लेख में यह भी बताया गया कि मई 2017 के मुक़ाबले, तकनीकी एवं व्यवसयिक घाटे कुछ राज्यों के लिए 26 अक्टूबर, 2018 तक की अवधि में बढ़े हैं. इन राज्यों में मणिपुर (43.74%), उत्तराखंड (40.92%), उत्तर प्रदेश (37.92%), छत्तीसगढ़ (31.62%), मध्य प्रदेश (31.06%) और पंजाब (31.3%) शामिल हैं.

इन तकनीकी एवं व्यवसयिक घाटों में बढ़ोतरी की एक वजह औसत लागत एवं औसत राजस्व के बीच के अंतर का बढ़ना है. जहां एक तरफ उदय योजना की दिशानिर्देशों के मुताबिक़ इस अंतर को 0.55 प्रति किलोवाट रखना था, वहीं इसमें असल अंतर उन राज्यों में ज़्यादा है जहां तकनीकी एवं व्यवसयिक घाटे 30% से ज़्यादा हैं. लेकिन ऐसे भी राज्य हैं जिनके तकनीकी एवं व्यवसयिक घाटे काफी ज़्यादा हैं पर जिनके औसत लागत एवं औसत राजस्व में अंतर कम है.

एक पुरानी रिपोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि किस तरह उदय योजना राज्य सरकारों के वित्तीय साधनों पर एक बड़ा बोझ है.

ज्ञात हो कि एनडीए सरकार के प्रमुख योजनाओं में एक उदय योजना एक वित्तीय पुनर्गठन योजना है जिसका उद्देश्य ऋण सवार डिस्कॉम की मदद करना था. लेकिन इस योजना के तहत राज्य सरकारों को इस ऋण का 75 प्रतिशत बोझ उठाने पर मजबूर किया गया.

ओडिशा, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़ और दिल्ली को छोड़कर सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश उदय के लांच के बाद से इस योजना में शामिल हो गए थे.

तत्कालीन उर्जा मंत्री पियूष गोयल ने इस योजना के लांच के समय कहा था कि यह “इस क्षेत्र में भविष्य के सभी संभावित मसलों एवं पिछले सभी समस्याओं का स्थायी समाधान है”.

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+