कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

BBC रिपोर्टः उज्ज्वला योजना के पोस्टर का चेहरा बनी महिला चुल्हे पर खाना बनाने को मजबूर

गुड्डी देवी ने कहा, “जब हमें 2016 में यह कनेक्शन मिला, तो 1 सिलेंडर की कीमत 520 रुपए थी. लेकिन अब एक सिलेंडर की कीमत 770 रुपए पहुंच गई है.”

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत साल 2016 में गैस कनेक्शन पाने वाली पहली महिला गुड्डी देवी ने एक बार फिर चुल्हे पर खाना बनाना शुरू कर दिया है. जिसका खुलासा बीबीसी की एक रिपोर्ट में हुआ है.

गुड्डी देवी साल 2016 से उज्ज्वला योजना का चेहरा बनी हुई हैं. हालांकि, इस योजना के कई अन्य लाभार्थियों की तरह वह भी लकड़ी या गोबर के उपलों का उपयोग कर चुल्हे पर खाना बना रही हैं.

इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे आने वाले प्रत्येक परिवार की एक महिला  को 1 साल में 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर लेने का अधिकार है. सिलेंडर कनेक्शन की लागत और पहले सिलेंडर का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता था. बाद के अन्य सिलेंडरों को दोबारा भरवाने की लागत का भुगतान लाभार्थियों को स्वयं करना होता है.

गुड्डी देवी कहती हैं, “लकड़ी लाना पड़ता है, उपले बनाने पड़ते हैं. इन सब चीजों से दिक्कत होती है. धुएं से भी जुझना पड़ता है.”

गुड्डी देवी ने आगे बताया, “जब हमें 2016 में यह कनेक्शन मिला, तो 1 सिलेंडर की कीमत 520 रुपए थी. लेकिन अब एक सिलेंडर की कीमत 770 रुपए पहुंच गई है.” उन्होंने कहा, “मुझे सिलेंडर खरीदने के लिए पैसा कहां से मिलेगा?”

ख़बर के अनुसार, गैस एजेंसी के मालिक अखिलेश गुप्ता ने बताया, “हम देखते हैं कि उज्ज्वला लाभार्थियों में से मात्र 30 प्रतिशत लोग ही दोबारा सिलेंडर भरवाने आते हैं.”

बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आयोजित रिसर्च इंस्टीस्यूट फॉर कम्पैसिनेट इकोनॉमिक्स (RICE) के द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि, इस योजना के तहत आने वाले 85 प्रतिशत लाभार्थी अभी भी चुल्हे का उपयोग करते हैं.

ग़ौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने भी हरसिल गांव की सच्चाई का खुलासा किया था. इस गांव को पीएम मोदी ने ‘स्मार्ट गांव’ घोषित किया था. गांव को डिजिटल इंडिया परियोजना की उपलब्धि बताया गया.

ठाकरे ने कहा केंद्र सरकार की दावों के मुताबिक गांव की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ था. गांव के युवाओं ने ठाकरे के साथ मंच साझा कर इस बात पर सहमति जताई और कहा कि वे लोग अब तक बेरोज़गार हैं.

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