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ग़ैर वाजिब है जम्मू-कश्मीर पर लगाई गई पाबंदी: UN के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने मोदी सरकार की आलोचना की

उन्होंने चिंता जताई है कि भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में लगाई गई पाबंदी से राज्य में अशांति और ख़तरा उत्पन्न हो सकता है.

जम्मू कश्मीर में संचार के साधनों को ध्वस्त करने पर संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने मोदी सरकार की तीखी आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन पर रोक लगाने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में कर्फ़्यू लगाई गई है, जो उचित नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की टीम में अमेरिका के डेविड काये, फ्रांस के मिशेल फॉर्स्ट, बर्नार्ड डुहैम, क्लिमेंट न्यालेटसोसी वोउल, एगन्स कल्लामार्ड शामिल हैं. उन्होंने चिंता जताई है कि भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में लगाई गई पाबंदी से राज्य में अशांति और ख़तरा उत्पन्न हो सकता है. विशेषज्ञों ने कहा है, “सरकार द्वारा बिना किसी स्पष्टीकरण के जम्मू-कश्मीर से इंटरनेट और दूरसंचार नेटवर्क को ध्वस्त करना मौलिक आवश्यकताओं के साथ औचित्यहीन है.” आगे उन्होंने कहा है कि सूचनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाना जम्मू-कश्मीर के लोगों पर सामूहिक दंड की तरह है.

विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि जम्मू-कश्मीर में भारी संख्या में सेना के जवानों की तैनाती को प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए किया गया है.

उन्होंने कहा, “हम भारतीय अधिकारियों को याद दिलाते हैं कि भारत सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध असम्बद्ध हैं क्योंकि वे जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सहमति के बिना किया गया है.” मानवाधिकार विशेषज्ञों ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी की भी निंदा की है.

उन्होंने कहा है कि इस तरह की पाबंदी मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है.

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