कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अन्यायपूर्ण, अनुचित और असहनीय है संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने का फ़ैसला: बार काउंसिल ऑफ इंडिया

बार काउंसिल के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा, "देश के कई न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के दमन को देश स्वीकार नहीं करेगा. प्रदीप नंद्राजोग और राजेन्द्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट में भेजने का फ़ैसला सनक से भरा और मनमाना है."

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने हाई कोर्ट के दो मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट भेजे जाने के कॉलेजियम के फ़ैसले पर आपत्ति जताई है. बार काउंसिल ने कहा है कि 10 जनवरी को कॉलेजियम द्वारा लिए गए फ़ैसले वापस लिया जाए.

बार काउंसिल के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने एक खत में कॉलेजियम के फ़ैसले को “अनुचित’ और “अन्यायपूर्ण” बताया है. उन्होंने कहा है, “देश के कई न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के दमन को देश स्वीकार नहीं करेगा. प्रदीप नंद्राजोग और राजेन्द्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट में भेजने का फ़ैसला सनक से भरा और मनमाना है.”

बार काउंसिल के चेयरमैन ने लिखा है, “हाल के दिनों में लोगों के मन में कॉलेजियम प्रणाली के प्रति विश्वास कम हुआ है.” कॉलेजियम के फ़ैसले पर उन्होंने कहा, “कॉउंसिल के पास संजीव खन्ना के सम्बंध में कोई शिकायत नहीं थी, इसलिए उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए था. उन्हें पद पर बैठाने के लिए देश के दूसरे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की वरीयता को दरकिनार करने की जरूरत नहीं थी. उन्होंने कहा कि बार काउंसिल कॉलेजियम और सरकार के पास ऐसे फैसलों को बढ़ावा न देने की अपील करेगी.

मनन मिश्रा ने कहा है कि दिल्ली बार काउंसिल ने भी कॉलेजियम के फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रस्ताव रखा है. उन्होंने कहा है कि देश के कई राज्यों के बार काउंसिल, उच्च न्यायालय और देश के कई बार एसोसिएशन ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास पत्र लिखकर कॉलेजियम के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की मांग की है.

मनन मिश्रा द्वारा लिखा पत्र-

10 जनवरी को पांच जजों की नई कॉलेजियम ने जस्टिस मदन लोकुर के सेवानिवृत्त होने के बाद अपनी पहली बैठक की थी. इस कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एन. वी रमन और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा शामिल थे.इस बैठक में कॉलेजियम ने एक प्रस्ताव पास किया. इसके मुताबिक 12 दिसंबर को कॉलेजियम द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेन्द्र मेनन की सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नति को रद्द किया गया. इनकी जगह पर कॉलेजियम ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिनेश माहेश्वरी और दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नति करने का फ़ैसला किया गया था. इस पूरी प्रक्रिया में दो उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों की वरीयता को दरकिनार किया गया था.

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+