कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अलीगढ़: ढाई साल की बच्ची की हत्या पर खेला जा रहा सांप्रदायिकता का गंदा खेल, टप्पल गांव में दंगे की स्थिति

गांव का मुस्लिम समुदाय काफी डरा हुआ है. दंगे के डर से मुस्लिम गांव छोड़कर भाग रहे हैं और जो लोग गांव में हैं वो अपने ही घर में कैद हैं.

अलीगढ़ में ढाई वर्षीय बच्ची की निर्मम हत्या को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश जारी है. घटना के बाद टप्पल गांव में बाहरी भगवा धारी लोगों का आना जाना लगा हुआ है. इस घटना को कवर करने गए कई पत्रकारों ने इसका जिक्र किया है.

घटनास्थल पर पहुंची द प्रिंट की रिपोर्टर ज्योति यादव ने टप्पल गांव हालिया परिस्थिती को बयां किया है.

ज्योति यादव ने लिखा, “अलीगढ़ से रिपोर्टिंग करके लौट रही हूँ. टप्पल गाँव में फ़रीदाबाद, गुरूग्राम और दिल्ली से भर-भर कर गाड़ियाँ जा रही हैं. गाँव में हज़ारों की संख्या में सीआरपीएफ और पुलिस वाले इन बाहरी युवकों को खदेड़ रहे हैं. दंगे की स्थिति हो गई है. मुँह पर भगवा कपड़ा बांधे किसी विशेष समुदाय से बदला लेने की बात करते हुए जय श्री राम के नारे लगा रहे हैं. कई सेना के जवानों से ही भिड़ जा रहे हैं. इनकी गाड़ियों को हाईवे पर ही रोका भी जा रहा है.”

वो आगे लिखती हैं, “इलाक़े में कर्फ़्यू जैसे हालात हैं. ट्विंकल के घर के सामने शोक सभा में कोई टीका लगाए हुए हिंदू आता है और सबको किसी अलग भाषा में कुछ समझा रहा है. अंदर ट्विंकल के पापा मुझसे कह रहे हैं कि हम इन लोगों की बातों में नहीं आ रहे हैं. ट्विंकल की माँ दस दिन से खाना छोड़े बैठी हैं. माता-पिता चाहते हैं दोषियों को फाँसी की सज़ा हो. मुस्लिम परिवार भी यही कह रहे हैं कि दोषियों को फाँसी से भी ऊपर की सज़ा हो. वो हमारी भी बच्ची थी.

लेकिन बाहर से आए इन युवकों को सजा से ज्यादा कुछ और चाहिए. ये दंगा चाहते हैं. मैं एक दंगे की स्थिति से निकल आ रही हूं. मुझसे तीन बार पूछा गया कि अपनी आईडी कार्ड भगवा रुमाल बांधे युवक को दिखाऊं. क्यों? क्या वो पुलिस है? प्रशासन है? कौन है ये भीड़?

एक और जगह भीड़ से निकलकर एक युवक मुझसे रिपोर्टिंग ना करने और वीडियो ना बनाने की बात धमकी भरे लहजे में कहने आया. पास खड़े ग्रामीणों ने धमकाया तो माना. हजारों की संख्या में खड़ी पुलिस को देखकर भी इन्हें खौफ नहीं है. ये पत्रकारों को धमका रहे हैं कि किस तरह की पत्रकारिता करनी चाहिए.

ये रुमाल बांधे भीड़ ही अब पुलिस है, जज है, वकील है और यही अब न्याय करेगी.”

द प्रिंट में छपी ज्योति यादव की रिपोर्ट के अनुसार, गांव का मुस्लिम समुदाय काफी डरा हुआ है. दंगे के डर से मुस्लिम गांव छोड़कर भाग रहे हैं और जो लोग गांव में हैं वो अपने ही घर में कैद हैं. घर से बाहर कोई नहीं निकल रहा है. छतों और ख़िडकियों से महिलाएं भीड़ को देख रही हैं. इस परिस्थिती को संभालने के लिए प्रशासन मुस्तैद खड़ी है.

रिपोर्ट के अनुसार, हत्याकांड का मुख्य आरोपी असलम पर अपने 9 वर्षीय बेटी के साथ बालात्कार, गांव के ही किसी महिला के साथ छेड़छाड़, दिल्ली के गोकुलपुरी के एक लड़के को अगवाह करने का मामला दर्ज हुआ था. इस मामले मे असलम सजा भी काट चुका है और वह अभी जमानत पर बाहर था. लेकिन, जाहिद इतना निर्मम हत्या कर सकता है, इसे लेकर लोग अब भी असमंजस में हैं.

टप्पल गांव के ग्रामीणों का कहना है कि, यह मामला एक हत्या का है. लेकिन, बाहरी लोग आकर इसे जानबूझकर सांप्रदायिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

ट्विंकल के पिता बनवारी शर्मा का कहना है कि, “मेरी बच्ची चली गयी. मैं बस चाहता हूं कि दोषियों कोसजा हो. मैं ये नहीं कह रहा कि पूरे मुस्लिमों को सजा हो. हम यहां सालों से भाईचारे के साथ रह रहे हैं. आप मेरा बयान ठीक से लिखना.”

बनवारी के बगल में बैठे उनके चचेरे भाई अनिल शर्मा कहते हैं, ‘तीन-चार दिन से बाहर के लोग आकर भड़काने की कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन हम नहीं भड़क रहे हैं. यह मामला हिंदू मुसलमान का है ही नहीं. आप बाहर जाकर देख सकते हैं कि अभी वो भड़काऊ बातें कर रहे हैं.’

हालांकि, पीटीआई के अनुसार, बीते रविवार को गांव के हालात को काबू करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी. लेकिन, सोमवार को शांति दिखी.

पीटीआई के हवाले से मिली ख़बर के अनुसार, पुलिस ने दक्षिणपंथी समूहों द्वारा किये गये प्रदर्शन को किसी तरह नियंत्रित किया. ये लोग टप्पल में महापंचायत करना चाह रहे थे. बताया जाता है कि महापंचायत की सूचना किसी हिन्दुत्व समूह ने सोशल मीडिया पर दी थी .

आसपास के ज़िलों के लोग भी महापंचायत में शामिल होने का प्रयास कर रहे थे लेकिन पुलिस ने टप्पल कस्बे में प्रवेश के रास्तों पर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया .

एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि हालात काबू में हैं . किसी को माहौल खराब करने की छूट नहीं दी जाएगी .

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का दुरूपयोग कर रहे कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गयी है .

कुलहरि ने इन खबरों को गलत बताया कि टप्पल में असुरक्षा महसूस कर रहे मुस्लिम समुदाय के लोग पलायन कर रहे हैं . कुलहरि ने कहा कि कुछ लोग अस्थायी तौर पर जा सकते हैं लेकिन जल्द लौट आएंगे

बता दें कि हत्याकांड को अंजाम देने वाले दोनों मुस्लिम युवक असलम और जाहिद पुलिस के हिरासत में हैं.

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