कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पुलवामा शहीद के अंतिम संस्कार पर पहुंचे भाजपा नेताओं पर लोगों ने उछाले जूते, पूछा – चुनाव से 2-3 महीने पहले क्या करने आए हो?

लोगों ने भाजपा नेता से कहा कि नितिन गडकरी मेरठ में एक कार्यक्रम में विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए समय निकाल सकते हैं तो यहां क्यों नहीं आ सकते?”

पुलवामा में एक मुठभेड़ में मारे गए सेना के सिपाही अजय कुमार के अंतिम संस्कार में मेरठ के बस्सी टिकारी गांव में इकठ्ठा हुए केंद्रीय मंत्रियों, विधायकों और भाजपा नेताओं को वहां मौजूद सैकड़ों लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार पाटला गांव के चौधरी चरण सिंह महाविद्यालय में शहीद जवान का पार्थिव शरीर रखा गया था. शहीद के अंतिम संस्कार में पहुंचने वाले अधिकांश नेताओं को अपने जूते और चप्पल निकालने के लिए कहा गया. मौक़े पर सरकार विरोधी नारे भी लगाये गये. वहीं, कुछ युवाओं ने नेताओं पर जूते-चप्पल भी फेंके. हालांकि किसी को चोट नहीं लगी, लेकिन मौके पर मौजूद बीजेपी नेताओं को नंगे पांव भागते हुए अपने कार की तरफ बढ़े.

वहीं, भीड़ में मौजूद किसी व्यक्ति ने पूछा कि, “आप गांव में क्यूं आए है? जब आम चुनाव होने में दो से तीन महीने बाकी हैं.” मौके पर मौजूद बीजेपी नेता से यह भी पूछा गया कि, “नितिन गडकरी यहां क्यों नहीं आए. यदि वह मेरठ में एक कार्यक्रम में विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए समय निकाल सकते हैं तो यहां क्यों नहीं आ सकते?”

इस घटना के बाद केंद्रीय मंत्री सत्य पाल सिंह मंगलवार सुबह गांव पहुंचे और ग्रमीणों द्वारा मांगों का एक ज्ञापन लिया. ज्ञापन में ग्रामीणों की मांग थी कि गांव की एक संपर्क सड़क का नाम शहीद जवान के नाम पर रखा जाना चाहिए.

वहीं, मौके पर मौजूद भाजपा एमएलसी सरोजनी अग्रवाल महिलाओं से घिरी हुई थीं. जिसमें शहीद जवान अजय कुमार की मां कमलेश भी शामिल थीं. शहीद जवान की मां ने सरोजनी अग्रवाल से कहा कि, “ कश्मीर में मेरे बेटे की मौत एक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और आतंकवादियों और पत्थरबाजों के बढ़े हुए मनोबल के कारण हुई है.”

मौके पर मौजूद राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने नारेबाजी कर रही भीड़ को हटाने की कोशिश की लेकिन असफल रहे. वहीं, भाजपा के व्यापारी प्रकोष्ठ के राज्य प्रमुख विनीत शारदा ने कहा कि, “ यह घटना (जूते उछालना) नफरत की राजनीति का परिणाम है. शहीद के अंतिम संस्कार में मौजूद विपक्षी पार्टी के नेताओं द्वारा यह साजिश रची गयी थी.”

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