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उत्तरप्रदेशः फर्जी मुठभेड़ पर यूएनएचआर ने जताई चिंता, कहा- यूपी सरकार और पुलिस हत्याओं को बढ़ावा दे रही है

रिपोर्ट में कहा गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने जांच प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है.

उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ों पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार (यूएनएचआर) ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. यूएनएचआर विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने की बात कही है.

न्यूज़ प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के विशेषज्ञों ने कथित मुठभेड़ में हुई 15 हत्याओं के मामले में केंद्र सरकार को विस्तृत जानकारी सौंपी है. इनमें ज्यादातर मामलें मुस्लिम समुदाय से जुड़े हुए हैं. विशेषज्ञों ने मुठभेड़ पर सरकार और पुलिस की तरफ से दिए बयानों पर चिंता जताते हुए रिपोर्ट में कहा कि इससे लगता है कि सरकार और पुलिस इन हत्याओं को बढ़ावा देने और सही ठहराने के साथ-साथ अपनी मंजूरी दे रही है.

ग़ौरतलब है कि जांच में विशेषज्ञों को पुलिस हिरासत में लोगों की मौत के सबूत मिले हैं जबकि पुलिस सभी मौतों को मुठभेड़ से जुड़े होने की बात कहती रही है. यूएनएचआर के विशेषज्ञों ने कहा कि हम हादसों के पैटर्न को लेकर परेशान हैं. पीड़ित के शरीर पर मिले जख़्मों के निशान से पता चलता है कि उन्हें प्रताड़ित किया गया है. और गिरफ़्तारी के बाद उनकी हत्या हुई है.

रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस ने जांच प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया है. जिनमें हत्या के बाद पुलिस द्वारा परिवार के सदस्यों को जानकारी न देना, परिजनों को मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट न देना और स्वतंत्र एजेंसी को मामले जांच भेजने जैसे आदेश शामिल हैं.

यूएनएचआर ने रिपोर्ट में यह भी कहा कि पीड़ित परिवारों और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों को पुलिस ने जान से मारने की धमकी दी है और उन्हें झूठे मामलों में भी फंसाया है. विशेषज्ञों ने कहा कि हमें लगतार हत्या के साथ धमकी और प्रताड़ना की रिपोर्ट मिलती रही है. यह सभी गंभीर आरोप हैं जिसके लिए तुंरत कार्रवाई करने की जरूरत है.

यूएनएचआर विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली की तुरंत समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार के सदस्यों और मामलों की जांच कर रहे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा करने की जरुरत है.

ज्ञात हो कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने 9 मई 2018 से 18 फर्जी मुठभेड़ो के मामले में जांच शुरू की थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट में इन कथित मुठभेड़ों की जांच के विषय में स्वतंत्र निकाय के गठन की मांग को लेकर एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 14 जनवरी को सुनवाई करेगा.

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