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उत्तर प्रदेश: चीनी मिलों के पास है अरबों रुपए का बकाया, पैसे के भुगतान को लेकर प्रदर्शन कर रहे मेरठ के किसान

किसानों का कहना है कि बैंक उनके पास कर्ज चुकाने की नोटिस लगातार भेज रहा है, जिससे वे अवसाद में जा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में आम चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है. लेकिन, प्रदेश के गन्ना किसान अपने बकाये की मांग को लेकर अब भी हलकान हैं. मेरठ जिले के गन्ना किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

भारतीय किसान आंदोलन के बैनर तले मेरठ के गन्ना किसानों ने गन्ना उपायुक्त के पास पत्र लिखकर कई मांगों को रखा है. किसानों की मांग है कि न्यायालय के निर्देशानुसार ब्याज सहित गन्ने के दाम किसानों को लौटाए जाएं.

इसके साथ ही किसानों की मांग है कि सभी गन्ना केंद्रों पर नियमित गन्ना तौलकर सभी लोगों के गन्ने को खरीदा जाए. किसानों ने कहा है कि बैंकों द्वारा कर्ज चुकाने का नोटिस भेजकर उत्पीड़न किया जाता है, इसपर तुरंत रोक लगाई जाए.

अपने पत्र में किसानों ने लिखा है कि चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का अरबों रुपए का बकाया है और बैंक किसानों के पास कर्ज चुकाने का नोटिस भेज रहे हैं. बैंकों के नोटिस के कारण किसान अवसाद में जा रहे हैं, जिससे उन्हें हाइ ब्लड प्रेशर, शुगर, और हार्ट की बीमारियां हो रही है.

इससे पहले इंडियन एक्सप्रेस में हरिश दामोदरन की रिपोर्ट में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का कुल 10,000 करोड़ से ज्यादा रुपए का बकाया है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य गन्ना आयुक्त के कार्यालय के आंकड़े के मुताबिक 2018-19 में अक्टूबर-सितम्बर के बीच किसानों से 24,888.65 करोड़ रुपए का गन्ना खरीदा गया था.

चीनी मिलों को गन्ना प्राप्ति के 14 दिनों के भीतर 22,175 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना था. लेकिन वास्तव में मात्र 12,339.04 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया गया है. इस प्रकार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कुल बकाया 10,074.98 करोड़ रुपए का है.

2014 के लोकसभ चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में भारी जीत हासिल की थी. राज्य में भाजपा की सरकार बनने से पहले पार्टी ने गन्ना किसानों को राहत देने की बात कही थी, लेकिन 2019 का आम चुनाव आ जाने के बाद भी आज तक किसानों की समस्या जस की तस बनी हुई है.

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