कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

उत्तराखंड के कई गांवों के लोग नहीं देंगे वोट, “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का दिया नारा

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क ना होने की वजह से मरीजों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है.

उत्तराखंड में दूर-दराज के क्षेत्रों में सड़क न होने की वजह से ग्रामीणों में खासा आक्रोश व्याप्त है. ग्रामीणों ने आगामी चुनावों को लेकर सड़क नहीं तो वोट नहीं का नारा देते हुए लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है.

अमर उजाला की ख़बर के अनुसार लोहाघाट के चंपावत में कई गांव सड़क की सुविधा से वंचित हैं. बाराकोट विकासखंड के सिंगदा गांव के लोगों ने “पहले रोड, फिर वोट” का एलान करते हुए आम चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है. अपनी शिकायतों को लेकर बीते बुधवार को ग्रामीणों ने ज़िलाधिकारी को ज्ञापन भेजा है.

रौ-भनार गांव की संरपंच गंगा देवी का कहना है कि भंडराबोरा, रौकुंवर, बिलहेड़ी, बुंगाचैकुनी समेत दूर-दराज के गांवों में सड़क न होने की वजह से ग्रामीणों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. सड़क न होने की वजह से बीमार व्यक्ति को डोली के सहारे 10 किमी की चढ़ाई करके अस्पताल पहुंचाना पड़ता है.

उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीण पहले भी कई बार धरना प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन अब तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ.

ग्रामीणों का कहना है कि राज्य का गठन होने के बाद कई सरकारें आईं, लेकिन ग्रामीणों की सड़क मांग को हमेशा अनसुना किया गया. राष्ट्रीय राजमार्ग से 4 किलोमीटर दूर सिंगदा गांव में सड़क नहीं होने की वजह से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बीमारों को अस्पताल पहुंचाने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है. मरीजों को डोली के सहारे सड़क तक लाने में तकरीबन 2 घंटे का समय लग जाता है.

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