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चौकीदारी या वफ़ादारी? विजय माल्या-नीरव मोदी के प्रत्यर्पण से जुड़ी जानकारी साझा करने से मोदी सरकार का इनकार

विदेश मंत्रालय ने कहा है, "वे लोग संबंधित ब्रिटिश अधिकारियों के विचाराधीन हैं. इस मामले में आरटीआई की धारा 8(1) (h) के अनुसार संचार की प्रति नहीं मुहैया कराई जा सकती."

विदेश मंत्रालय ने भगोड़े व्यापारी विजय माल्या और नीरव मोदी के प्रत्यर्पण से जुड़ी जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है. आरटीआई कानून की एक धारा का हवाला देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह जानकारी साझा करने पर अपराधियों के अभियोजन की प्रक्रिया में बाधा पहुंच सकती है.

एक आरटीआई का जवाब देते हुए मंत्रालय ने कहा है कि विजय माल्या और नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटिश सरकार के पास अनुरोध किया गया है.

पीटीआई के पत्रकार द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा है, “वे लोग संबंधित ब्रिटिश अधिकारियों के विचाराधीन हैं. इस मामले में आरटीआई की धारा 8(1) (h) के अनुसार संचार की प्रति नहीं मुहैया कराई जा सकती.

आरटीआई की इस धारा में ऐसी सूचनाएं देने से मनाहीं की गई है, जिससे अपराधियों के प्रत्यर्पण पर असर पडे़.

शराब कारोबारी विजय माल्या ब्रिटेन में जमानत पर है. उस पर 9000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है.

इसी साल फरवरी में ब्रिटेन के गृह सचिव ने विजय माल्या के प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोध पर सहमति दी थी. इसके ख़िलाफ़ विजय माल्या ने ब्रिटेन के उच्च न्यायालय में अपील की है, जिसपर 2 जुलाई को सुनवाई होनी है.

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की तैयारी भी लंदन में चल रही है. पंजाब नेशनल बैंक के साथ धोखाधड़ी और 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नीरव मोदी के जमानत को तीन बार रद्द किया जा चुका है.

पीटीआई इनपुट्स पर आधारित

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