कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

प्रवासी मज़दूरों पर हमला: गुजरात मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी और मुख्य सचिव को नोटिस भेजा

उनसे सुरक्षा और क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए क़दमों की रिपोर्ट मांगी गई है।

बुधवार को गुजरात राज्य मानवाधिकार आयोग (जीएसएचआरसी) ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को हिंदी भाषी प्रवासी श्रमिकों के हमलों और पलायन पर रिपोर्ट मांगने के लिए नोटिस जारी किया है।

जीएसएचआरसी अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अभिलाषा कुमारी ने संवाददाताओं से कहा कि पुलिस को 20 दिनों के भीतर रिपोर्टों को जमा करना होगा। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव जे.एन सिंह और डीजीपी शिवानंद झा को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें राज्य में प्रवासी मज़दूरों पर लगातार हो रहे हमले के तहत उनकी सुरक्षा और क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए क़दमों की रिपोर्ट मांगी गई है।

ज्ञात हो कि साबरकंठा ज़िले में 14  महीने की बच्ची के कथित बलात्कार की घटना और बिहार के रहने वाले एक मज़दूर पर इसके कथित आरोप पर गिरफ्तारी के बाद उत्तरप्रदेश और बिहार के लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया गया जिसके बाद हज़ारों की तादाद में प्रवासी मज़दूर गुजरात से पलायन कर रहे हैं।

मंगलवार को गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा कि 61 मामलों से इस संबंधित 533 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिंदी भाषी प्रवासियों के पलायन को लेकर कहा था कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के युवाओं पर हमला किया जा रहा है और उन्हें गुजरात छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

पुलिस ने औद्योगिक एस्टेट और उन स्थानों के आस-पास के इलाकों में गश्त तेज़ कर दिया है जहां प्रवासी श्रमिक लोगों के बीच विश्वास पैदा करने की कोशिशें कर रहे हैं।

गुजरात में उत्तर भारतीयों के एक संगठन, उत्तर भारतीय विकास परिषद, के अध्यक्ष श्याम सिंह ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि 60,000 से अधिक हिंदी भाषी प्रवासी श्रमिक अब तक राज्य से भाग गए हैं।

पीटीआई इनपुट्स पर आधारित    

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