कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पश्चिम बंगाल में 10 हज़ार श्रमिकों का छिन गया रोज़गार, बंद हुए 2 बड़े जूट मिल

जूट मिल मालिक पिछले नौ सालों में करीब 9 बार मिलों को बंद कर चुका है.

दक्षिण बंगाल के हुगली ज़िले में 3  दिसंबर को हेस्टिंग्स और उत्तरी ब्रुक जूट मिलों से करीब 10,000 कामगारों को नौकरी से निकाल दिया गया है.

इन दोनों मिलों के बंद होने से पहले श्रीरामपुर के भारत जूट मिल और चंदनगर के गोंडलपारा मिल के 6,000 श्रमिकों ने भी अपनी नौकरियां खो दी थीं. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन के निदेशक संजय कामरिया हेस्टिंग्स, इंडिया जूट मिल और गोंडलपारा मिल के मालिक हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक हेस्टिंग्स, इंडिया जूट मिल और गोंडलपारा मिल के श्रमिकों ने कहा कि कच्चे माल की कमी की वजह से मिल बंद हुई है. द हिंदू से बात करते हुए, गोंडलपारा मिल मजदूर राजेश जैसवाड़ा ने कहा,  “मालिक (संजय कामरिया) ने हमें बताया कि पैसों की कमी के कारण मिलों के लिए कच्चे माल नहीं खरीदी जा रही है. पिछले सात महीनों से इंडिया जूट मिल और आठ महीनों से गोंडलपारा जूट मिल बंद है.”

उन्होंने कहा, “प्रबंधन किसी भी जूट मिल को चलाने में सक्षम नहीं है. मालिक ऋण लेने में भी असमर्थ हैं, क्योंकि वह बैंकों को अपनी संपत्ति के विवरण का खुलासा करने से डरते हैं. इस मामले को सुलझाने के लिए हमने मालिक और श्रम मंत्री मोलो घाटक से छह-सात बार बैठक की थी. फिर भी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया. हमने उन्हें मिलों को बेचने का भी सुझाव दिया ताकि हम अपनी नौकरियों को खोने से बच सकें,  बैठक में सहमत होने के बावजूद भी इस मामले के बारे में कुछ भी नहीं किया गया.”

इंडियन ट्रेड यूनियनों के वर्तमान राज्य सचिव और एक पूर्व मंत्री अनंदी साहू ने कहा कि प्रबंधन समस्या के कारण मिलों को बंद किया गया है और  कच्चे माल की कमी से इसका कोई लेना-देना नहीं है. यह आंतरिक प्रबंधन की समस्या है. पहले प्रबंधन बाजार में कच्चे माल बेचते हैं और श्रमिकों को बताते हैं कि कोई कच्ची सामग्री उपलब्ध नहीं है. दूसरा, प्रबंधन अधिक उत्पादन चाहता है, लेकिन वे श्रमिकों को बहुत कम भुगतान कर रहे हैं और उनका शोषण कर रहे हैं, खासकर उत्तरी ब्रुक जूट मिल में श्रमिकों का शोषण होता है.”

मिल श्रमिकों के मुताबिक, काजरिया के पास मिलों को बंद करने का लंबा इतिहास है. श्रमिकों ने कहा कि 2009 और 2018 के बीच, काजरिया ने अपनी मिलों को नौ बार बंद किया था.

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