कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

संघ परिवार को रास न आई विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति की आज़ादी, प्रोग्राम करवाने पर कॉलेज प्रशासन से मंगवाई माफ़ी

पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज ने दलित कार्यकर्ता सेवानिवृत बॉम्बे उच्च न्यायालय के जज बी जी कोलसे पाटिल को दिया न्यौता दिया गया था, लेकिन विरोध को देखते हुए बाद में इस प्रोग्राम के लिए माफ़ी मांगनी पड़ी.

सावित्री बाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी में अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर हो रहे कार्यक्रम को दक्षिणपंथी संगठनों और संघ परिवार का विरोध झेलना पड़ा. बात यही नहीं रुकी दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध के दबाव में कॉलेज प्रशासन को माफ़ी भी मांगनी पड़ी.

द टेलीग्राफ की एक ख़बर के मुताबिक़, पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में दलित कार्यकर्ता सेवानिवृत बॉम्बे उच्च न्यायालय के जज बी जी कोलसे पाटिल को दिया न्यौता दिया गया था. कॉलेज ने पाटिल को संविधान के विकास पर एक लेक्चर देने के लिए बुलाया था. लेकिन अंतिम समय में फर्ग्युसन को चलाने वाले डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी ने कॉलेज को यह निमंत्रण वापस लेने के निर्देश दिए.

हालांकि विद्यार्थियों से घिरे 78 वर्षीय कोलसे पाटिल ने कॉलेज के लॉन में ही 20 मिनट का लेक्चर दिया. इस दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, पतित पावन संगठन जैसे कुछ दक्षिणपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने उनके भाषण को बाधित करने के लिए नारेबाज़ी की.

वहीं दूसरी तरफ़ चेन्नई के लोयोला कॉलेज में भी इस प्रकार के एक प्रोग्राम को विरोध का सामना करना पड़ा है. कॉलेज की पेंटिंग्स प्रदर्शनी को लेकर केंद्रीय मंत्री पी राधाकृष्णन समेत भाजपा के कई नेताओं ने कॉलेज प्रशासन पर कार्रवाई की मांग की. इसके बाद कॉलेज प्रशासन को माफ़ी मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा.

दरअसल, यह पेंटिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत माता और हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद को लेकर बने थे. लोयोला कॉलेज ने अल्टरनेटिव मीडिया सेन्टर नामक तमिल नाडु के लोक कला पर काम कर रहे एक एनजीओ के साथ मिलकर एक आर्ट फेस्टिवल का आयोजन किया था.

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+