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WHO की रिपोर्ट: हर साल दो लाख लोग होते हैं कुष्ठ रोग से ग्रसित, आधे से ज़्यादा मामले भारत में

दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए WHO की क्षेत्रीय निदेशक पूनम क्षेत्रपाल सिंह ने दो कानूनों को निरस्त करने के लिए भारत की सराहना की है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बीते शुक्रवार को बताया कि दुनिया भर से  हर साल  कुष्ठ (कोढ़) रोग के दो लाख मामलों में से आधे से ज्यादा मामले भारत के होते हैं.

दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए WHO की क्षेत्रीय निदेशक पूनम क्षेत्रपाल सिंह ने दो कानूनों को निरस्त करने के लिए भारत की सराहना की है.  निरस्त किए गए इन कानूनों में पहला कुष्ठ से पीड़ित लोगों के ख़िलाफ़ भेदभाव और दूसरा तलाक लेने के लिए कुष्ठ रोग को वैध आधार मानना.

पूनम क्षेत्रपाल सिंह ने बताया कि अच्छे होने के लिए कुष्ठ रोग को समाप्त करने में कुष्ठ संबंधी भेदभाव, लांछन और पूर्वाग्रह सबसे प्रमुख बाधाएं हैं. विशेष रूप से शुरू में बीमारी का पता लगने पर इसका 100 प्रतिशत इलाज होना संभव है.

द वायर की ख़बर  के मुताबिक, उन्होंने कहा कि WHO की वैश्विक कुष्ठ कार्यनीति 2016-2020 के अनुसार, ‘सभी कुष्ठ कार्यक्रमों के केंद्र में ऐसी नीतियां होनी चाहिए जो कुष्ठ रोग से संबंधित भेदभाव, कलंक और पूर्वाग्रह को समाप्त करने को बढ़ावा दें. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कुष्ठ रोग के मामले में तेजी से गिरावट आई है. हालांकि दुनिया में एक अनुमान के मुताबिक हर साल दो लाख मामले सामने आते हैं, जिसमें आधे मामले भारत में होते हैं.

पूनम क्षेत्रपाल सिंह ने कहा कि अधिकांश देशों में पहले से ही कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण में शामिल किया जा रहा है और इन कार्यक्रमों का विस्तार किया जाना चाहिए.

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