कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

75 में से 41 जिलों में नहीं बना है शौचालय, फिर भी 2 नंवबर को उत्तर प्रदेश को ओडीएफ घोषित करेगी सरकार

इस परियोजना पर काम कर रहे अधिकारियों का कहना है कि अभी राज्य को खुले में शौच से मुक्त बनाने में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है।

2 अक्टूबर को ‘स्वच्छता ही सेवा है’ कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वीकार कर लिया कि राज्य के 75 जिलों में से केवल 34 जिले ही खुले में शौच से मुक्त यानी (ओ.डी.एफ) हैं।

नेशनल हेराल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक अपने लक्ष्य पर बुरी तरह विफल होने के कारण, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने ओडीएफ घोषित करने की समय सीमा 2 नवंबर  2018 तक बढ़ा दी है। हालांकि, परियोजना पर काम कर रहे एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि उत्तर प्रदेश को ओ.डी.एफ बनने के लिए कम से कम छह महीने की जरूरत है।

रिपोर्ट के मुताबिक 850 प्रखंडों में से केवल 220 को ओ.डी.एफ घोषित किया जा रहा है। यह प्रखंडों की कुल संख्या के 25 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। यह अंतर बहुत बड़ा है और इसे समुचित मूल्यांकन की जरूरत है कि क्या सच में उत्तर-प्रदेश अगले छह महीनों के भीतर ओडीएफ बन सकता है।

केंद्रीय पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की वेबसाइट का दावा है कि 56,000 में से 46,000 से अधिक गांवों ने खुद को ओ.डी.एफ घोषित कर दिया है।

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